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वर्ण

  • पुरोहितों द्वारा लोगों को वर्णों के आधार पर चार समूहों में विभाजित किया गया।
  • उनके अनुसार, प्रत्येक वर्ण के अलग-अलग कार्य होते थे।
  • ये समूह जन्म के आधार पर तय किए गए थे।

1. ब्राह्मण: ब्राह्मणों का कार्य था कि वे वेदों का अध्ययन कर शिक्षा प्रदान करें, बलि दें और उपहार प्राप्त करें।

2. क्षत्रिय: वे शासक थे और उनसे लड़ाई लड़ने और लोगों की रक्षा करने की अपेक्षा की जाती थी।

3. विश या वैश्य: किसान, चरवाहे और व्यपारी वैश्य वर्ण के अंतर्गत थे। क्षत्रिय और वैश्य दोनों ही बलि दे सकते थे।

4. शूद्र: शूद्रों का कार्य अन्य तीन समूहों की सेवा करना था तथा इन्हें किसी भी प्रकार का अनुष्ठान करना निषेध था। प्राय:, महिलाओं को भी इसी समूह में रखा जाता था। उन्हें वेदों का अध्ययन करने की अनुमति नहीं थी।

  • बाद में, कुछ लोगों को अछूत के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
  • इनमें कुछ कारीगर, शिकारी, लकड़ी इकट्ठा करने वाले और श्मशान और दफनाने में मदद करने वाले लोग शामिल थे।
  • पुरोहितों के अनुसार, इन समूहों के साथ संपर्क अपवित्र माना जाता था।

जनपद

● जो राजा बलि देते थे , उन्हें जन के स्थान पर जनपद के राजा के रूप में मान्यता दी गई।

● जनपद शब्द का शाब्दिक अर्थ है वह भूमि जहाँ जन अपने पद (पैर ) को स्थापित करते हैं, और बस जाते हैं।

● इन जनपदों में कई बस्तियों की खुदाई की गई है। उदाहरण: दिल्ली में पुराना किला, मेरठ के पास हस्तिनापुर।

● लोग झोपड़ियों में रहते थे और गौवंश और दूसरे मवेशी रखते थे।

● वे तरह-तरह की फसलें उगाते थे।

● वे मिटटी के बर्तन बनाते जो ग्रे या लाल रंग के होते थे।

● इन स्थलों पर पाए जाने वाले एक विशेष प्रकार के मिट्टी के बर्तनों को पेंटेड ग्रे वेयर के नाम से जाना जाता है।

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महाजनपद

• लगभग 2500 वर्ष पूर्व, कुछ जनपद दूसरों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो गए और उन्हें महाजनपद के रूप में जाना गया।

• अधिकांश महाजनपदों की राजधानियां किलाबंद थीं जिसका अर्थ है कि उनके चारों ओर विशाल दीवारें बनाई गई थीं। ये दीवारें क्यों बनाई गईं?

1.संभवत: दीवारें अन्य राजाओं के हमलों से सुरक्षित रहने हेतु बनाई जाती थी।

2.शायद कुछ शासक इन ऊँची और विशाल दीवारों द्वारा अपना ऐश्वर्य, शक्ति एवं सम्पनता दर्शाना चाहते थे।

3. किले के अंदर रहने वाले लोगों और भूमि पर राजा अधिक आसानी से नियंत्रण रख सकते थे।

• नए राजा सेना रखने लगे।

• सैनिकों को नियमित वेतन का भुगतान किया जाता था और पूरे वर्ष राजा द्वारा उनकी देखभाल की जाती थी।

• संभवतः भुगतान के लिए चिह्नित सिक्कों का उपयोग किया जाता था।

कर

• महाजनपदों के शासकों को विशाल किलों के निर्माण और सेनाओं के भरण पोषण के लिए संसाधनों की आवश्यकता थी। इसलिए, उन्होंने नियमित कर जमा करना शुरू कर दिया।

• अधिकांश लोग किसान थे, इसलिए फसलों से आने वाला कर सबसे महत्वपूर्ण था। किसानो को अपने पूर्ण उत्पादन का ⅙वा हिस्सा कर के रूप मे देना था। इस प्रकार के कर को भाग कहा जाता था।

• शिल्पकारों पर भी श्रम के रूप में कर लगाए जाते थे।

• चरवाहों को भी पशुओं और पशु उत्पादों के रूप में करों का भुगतान करना पड़ता था।

• व्यापार के लिए लाए जाने वाले समान के खरीदने और बेचने पर भी कर लगाया जाता था।

• शिकारियों और लकड़ी इकट्ठा करने वालों को वन उपज राजा को उपलब्ध करानी होती थी।

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कृषि में परिवर्तन

• लोहे के हल फलकों का उपयोग बढ़ रहा था और अधिक अनाज का उत्पादन किया जा सकता था।

• लोगों ने धान की रोपाई शुरू कर दी। इसका मतलब यह था कि जमीन पर बीज बिखरने के बजाय, पौधे उगाए गए और फिर खेतों में लगाए गए। इससे उत्पादन में वृद्धि हुई, क्योंकि पहले से ज्यादा पौधे जीवित रहने लगे। ।

• आम तौर पर दासों (दासों और दासियों) और भूमिहीन खेतिहर मजदूरों (कामकारों ) को यह काम करना पड़ता था।

मगध

• यह लगभग 200 वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण महाजनपद बन गया।

• गंगा और सोन जैसी महत्वपूर्ण नदियाँ इसके मध्य से बहती थीं जिससे परिवहन, जल आपूर्ति और भूमि को उपजाऊ बनाने में मदद मिली।

• बिम्बिसार और अजातशत्रु दो बहुत शक्तिशाली शासक थे।

• महापद्मानंदा एक और महत्वपूर्ण शासक था।

• बिहार में स्थित राजगृह कई वर्षों तक मगध की राजधानी रही । इसके पश्चात पाटलिपुत्र को मगध की राजधानी बनाया गया।

वज्जि

• जिस समय मगध एक शक्तिशाली राज्य बना, उसी समय एक अलग प्रकार की शासन प्रणाली, जिसे गण (एक समूह जिसमें कई सदस्य हैं) या संघ (संगठन या संघ) के रूप में वैशाली (बिहार) को अपनी राजधानी बना कर वज्जि का उदय हुआ।

• इस प्रणाली में एक नहीं, बल्कि कई शासक थे। प्रत्येक एक राजा के रूप में जाना जाता था।

• वे मिलजुल कर सारे अनुष्ठान करते थे।

• वे सभाओं में मिलते थे और भविष्य में किए जाने वाले कार्यो और नीतियों पर विचार विमर्श करते थे।

• हालाँकि, महिलाएँ, दासियाँ और कामकार इन सभाओं में भाग नहीं ले सकतें थे।

• बुद्ध और महावीर दोनों ही गण या संघ से संबंधित थे। (दीघा निकाय एक प्रसिद्ध बौद्ध पुस्तक है, जिसमें बुद्ध के कुछ भाषण हैं, जो लगभग 2300 साल पहले लिखे गए थे)।

• शक्तिशाली राज्यों के राजाओं ने संघो को जीतने की कोशिश की। फिर भी, ये बहुत लंबे समय तक चले, लगभग 1500 साल पहले तक , जिसके बाद अंतिम गणों या संघो को गुप्त शासकों ने जीत लिया ।

Source : NCERT

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