CJI role and appointment in hindi
Source: DNAIndia
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भारत के नए मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) – भूमिका और नियुक्ति (Read in English)

  • न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर को भारत के 44 वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में नियुक्त किया गया है।
  • वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति के दशक पुराने परम्परा का पालन किया गया है।
  • वह 4 जनवरी, 2017 को मुख्य न्यायाधीश  टी.एस. ठाकुर के सेवानिवृत्त होने के एक दिन पहले पद ग्रहण करेंगे।
  • न्यायमूर्ति खेहर सात महीने से अधिक अवधि के कार्यकाल के लिए होंगे।

मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के तरीके को बताता है।
  • भारत का राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट और उच्च अदालतों के इस तरह के न्यायाधीशों जिन्हे वो आवश्यक समझता है, उनके साथ परामर्श के बाद मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करता है।
  • परंपरा के अनुसार, निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश भारत के राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के नाम की सिफारिश करता है तब मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के लिए उसे नियुक्त किया जाता है।

योग्यता

  • वह भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • वह उच्च न्यायालय के कम से कम पांच साल के या उत्तराधिकार में दो या दो से अधिक ऐसे कोर्ट का न्यायाधीश होना चाहिए। या
  • वह उत्तराधिकार में दो या दो से अधिक या उच्च न्यायालय के ऐसी अदालतों में कम से कम दस साल के लिए एक वकील होना चाहिए। या
  • वह राष्ट्रपति की राय में एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता होना चाहिए।
  • इसका मतलब यह है कि उनकी नियुक्ति के लिए कोई न्यूनतम उम्र नहीं निर्धारित किया गया है।

पदावधि

  • एक बार जब नियुक्त हो जाये उसके बाद वह मुख्य न्यायाधीश कार्यालय में 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक रहता है।
  • अनुच्छेद 124 (4) उन्हें हटाने की प्रक्रिया की बात करता है, जिसके अनुसार केवल महाभियोग की प्रक्रिया से संसद की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा उसे हटाया जा सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट के किसी भी न्यायाधीश पर अब तक महाभियोग की कार्यवाही नहीं की गई है।
  • वह राष्ट्रपति को लिख कर भी इस्तीफा दे सकता हैं।

मुख्य न्यायाधीश की भूमिका

  • मुख्य न्यायाधीश भारत की न्यायपालिका और भारत के उच्चतम न्यायालय का मुख्य होता है। यह सर्वोच्च पद है जिसे भारत में एक न्यायाधीश द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
  • वह मामलों के आवंटन और कानून के महत्वपूर्ण मामलों से निपटने के लिए संवैधानिक बेंच नियुक्त करता है।
  • वह सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक कार्यों में भी प्रमुख होता हैं।

प्रशासनिक कार्य:

  • वह सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों के मामलों का आवंटन करता है।
  • वह रोस्टर को बनाए रखता है।
  • वह अदालत के अधिकारियों की नियुक्ति करता है।
  • वह सुप्रीम कोर्ट से संबंधित अन्य सामान्य कार्यों को करता है।

 

  • मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के इस तरह के अन्य न्यायाधीशों जिन्हें वह आवश्यक समझे उनके परामर्श के बाद उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीश भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है।
  • इस उद्देश्य के लिए मुख्य न्यायाधीश के साथ परामर्श अनिवार्य है।
  • राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के दोनों कार्यालय रिक्त होने पर वह भारत के राष्ट्रपति के रूप में भी कार्य करता है।

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