india-japan relations
print
India-Japan Relations: Outcomes of the Summit

India-Japan Civil Nuclear Deal

  • On PM Modi’s recent visit to Japan, the two countries signed a civil nuclear deal.
  • Japan already has 13 such agreements with countries including US and France and India is the first non- NPT country to sign a nuclear deal with Japan.

Benefits of the Deal

  • The deal will allow India to have access to nuclear energy technology, reactors and critical parts from Japan.
  • The deal will benefit US-based companies like Westinghouse and GE to set up atomic plants in India as both these companies have considerable Japanese investments.
  • India has plans to increase nuclear capacity ten-fold by 2032. The deal will help in achieving the ambitious target.
  • The deal will allow India to reprocess fuel and enrich uranium, but highly enriched uranium that is used to construct nuclear weapons can be used only after written agreement by Japan.
  • The deal will make it all the more difficult for China to keep India out of NSG because terms of the deal have de facto brought India within the NPT framework. The nullification clause has reduced the need for NPT.
  • The 2011 Fukushima disaster had reduced demand for nuclear energy and technology at home which has now forced Japan to look for selling it abroad.

What is the Nullification Clause in the deal?

  • Critics fear that this deal can have a risk of Japanese technology being diverted to India’s nuclear technology programme.
  • Nullification Clause: According to this clause, Japan has the option to call off the deal by giving a one-year notice in case India resorts to nuclear testing.
  • This clause can result in a major shutdown of India’s nuclear power capabilities as most of the future reactors of India will have Japanese spare parts with the exception of Russian reactors.
  • India cannot claim compensation from Japan for economic losses due to disruption of power generation as a result of application of the nullification clause.
  • This is a substantial shift in India’s nuclear diplomacy and many countries,with which India has nuclear agreements, will be annoyed .

Other Agreements

  • An agreement fo cooperation in space was signed between ISRO and JAXA (the Japanese space body).
  • A MoU was signed for investment in infrastructure projects in railways and transport terminals.
  • An agreement has also been signed between Gujarat state government and Hyogo Prefectural government for cooperation in academics, disaster management, business, culture and environmental protection.
  • Mumbai-Ahmedabad High-Speed Rail Project– The technology of the famous Shinkansen bullet train will be used for the Mumbai-Ahmedabad high-speed railway.
  • Manufacturing Skill Transfer Promotion Programme– Another agreement was signed to skill 30,000 Indian youth in the Japanese-styled manufacturing in the next 10 years. As per the programme, the skills will be imparted through the establishment of Japan-India Institutes for Manufacturing (JIM) and the Japanese Endowed Courses (JEC) in engineering colleges designated by Japanese companies in India in cooperation between the public and the private sectors.
  • Pacts on cooperation in earth sciences, agriculture, forestry, fisheries, transport, urban development and sports have also been signed between the two countries.
  • Japan National Tourism Organization (JNTO) office will be opened up in New Delhi and the year 2017 has been marked as the year of India-Japan friendly exchanges in the fields of culture and tourism.
  • Japan also expressed its support for India’s entry into the Nuclear Suppliers Group, the Wassenaar Arrangement and Australia Group.

भारत-जापान असैन्य परमाणु करार

  • मोदी की हाल की जापान यात्रा पर, दोनों देशों ने एक असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • जापान पहले से ही अमेरिका और फ्रांस सहित कई देशों के साथ 13 तरह के करार कर चुका है और भारत पहला गैर एनपीटी देश है जिसने जापान के साथ परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किया।

समझौते के लाभ

  • इस समझौते से जापान भारत को परमाणु ऊर्जा प्रौद्योगिकी, रिएक्टरों और महत्वपूर्ण भागों को उपयोग करने की अनुमति देगा।
  • इस समझौते से वेस्टिंगहाउस और जीई जैसी अमेरिका आधारित कंपनियों को भारत में परमाणु संयंत्र स्थापित करने के रूप में फायदा होगा, इन दोनों कंपनियों में काफी जापानी निवेश है।
  • भारत की 2032 तक परमाणु क्षमता को दस गुना बढ़ाने की योजना है। इस समझौते से इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
  • इस समझौते से भारत को ईंधन के पुनर्संसाधन और यूरेनियम संवर्धन करने की अनुमति होगी, लेकिन अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम है जोकि परमाणु हथियारों के निर्माण के लिए प्रयोग किया जाता है उसे जापान द्वारा लिखित समझौते के बाद ही इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • इस सौदे से  भारत को एनएसजी से बाहर रखने के लिए चीन को और अधिक मुश्किल होगी क्योंकि इस समझौते की शर्त है कि वास्तविक एनपीटी ढांचे के भीतर भारत को लाया जाये।
  • 2011 फुकुशिमा आपदा से गृह में परमाणु ऊर्जा और तकनीक मांग कम थी। जिससे इसे विदेशों में बेचने के लिए जापान मजबूर हो गया।

सौदे में अकृतीकरण धारा क्या है?

  • आलोचकों को डर है कि इस सौदे से जापानी प्रौद्योगिकी को खतरा हो सकता है, जिसे भारत की परमाणु प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के लिए भेजा जा रहा है।
  • अकृति करण धारा : इस धारा के अनुसार, भारत के परमाणु परीक्षण प्रयोग के मामले में जापान के पास एक साल की नोटिस देकर सौदा रद्द करने का विकल्प है।
  • इस धारा के परिणाम स्वरूप भारत के परमाणु ऊर्जा की क्षमताओं की समाप्ति होगी, भारत के अधिकांश भविष्य के रिएक्टरों में रूसी रिएक्टरों के अपवाद के साथ जापानी स्पेयर पार्ट्स होंगे।
  • अकृति करण के आवेदन के परिणाम स्वरूप भारत बिजली उत्पादन के विघटन के कारण हुए आर्थिक नुकसान के लिए जापान से मुआवजे का दावा नहीं कर सकते।
  • यह भारत के परमाणु कूटनीति में एक बड़ा बदलाव है, अन्य कई देश जिन्होंने  भारत के साथ परमाणु करार किया है उनके नाराज होंने की सम्भावना है।

अन्य समझौते

  • अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौते पर इसरो और JAXA (जापानी अंतरिक्ष संस्था) के बीच हस्ताक्षर किए गए थे।
  • रेलवे और परिवहन टर्मिनलों में आधारिक संरचना के परियोजनाओं में निवेश के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • पढ़ाई में सहयोग, आपदा प्रबंधन, व्यापार, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के लिए गुजरात राज्य सरकार और ह्योगो प्रीफेक्चुरल सरकार के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना- प्रसिद्ध शिंकनसेन बुलेट ट्रेन की तकनीक को मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
  • विनिर्माण कौशल स्थानांतरण संवर्धन प्रोग्राम- 30,000 भारतीय युवाओं को अगले 10 वर्षों में जापानी स्टाइल में विनिर्माण क्षेत्र में कौशल विकास के लिए एक और समझौते पर हस्ताक्षर किया गया।
  • कार्यक्रम के अनुसार,जापान-भारत कौशल विनिर्माण (JIM)  संस्थानों की स्थापना के माध्यम से और जापानी संपन्न पाठ्यक्रम (जे ई सी) से भारत में जापानी कंपनियों द्वारा नामित इंजीनियरिंग कॉलेजों में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग दिया जायेगा।
  • कृषि, वानिकी, मत्स्य पालन, परिवहन, शहरी विकास और खेल, पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग के समझौते पर दोनों देशों के बीच हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्र में आदान-प्रदान के लिए जापान राष्ट्रीय पर्यटन संगठन (JNTO) का कार्यालय नई दिल्ली में खोला जाएगा और वर्ष 2017 को भारत-जापान के मैत्रीपूर्ण वर्ष के रूप में चिह्नित किया गया है।
  • जापान ने भी परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह, वासेनार व्यवस्था और ऑस्ट्रेलिया समूह में भारत के प्रवेश के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया है।

Leave a Reply