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निर्मला सीतारमण को देश के प्रथम महिला रक्षामंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। हालांकि यह बात सच नही है कि इंद्रा गांधी पहली महिला रक्षा मंत्री थी वस्तुतः उनके पास रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार था तथा मंत्रालय का कार्यभार राज्य रक्षा मंत्री पर था।
हमारी सेनाये सात दशकों से लगातार लड़ाईया लड़ रही है तथा उन्होंने अपनी क्षमताओं को साबित भी किया है। दुनिया के शीर्ष ५-६ सेनाओ में हमारी तीनो सेनाये स्थान रखती है।नई रक्षा मंत्री को यह ताक़त विरासत में मिली है।

Government of India Ministries and their departments

चुनौतियां

  • 1980 के दशक के मध्य में हमारे पास दो विमानवाहक पोत और करीब 20 पनडुब्बियां थी जो वर्तमान में क्रमशः घटकर 1 और 12 रह गयी है तथा देश मे बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टरों की तादाद भी कम है उनकी कमी भी पूरी करनी होगी।
  • वायु सेना में लड़ाकू विमानों की संख्या 35 हो गयी है जबकि इनकी आदर्श संख्या 45 होनी चाहिए। देशी हल्के लड़ाकू विमान (LCA) की बात करे तो अभी उसका प्रमाणन होना बाकी है।
  • सेना में देसी अर्जुन टैंक जरूरत से अधिक भारी है अतः उसे सीमित जगहों पर ही तैनात किया जा सकता है तथा 155mm की आर्टिलरी गन तीन दशक पुरानी हो चुकी है।
  • नई रक्षा मंत्री ने मेक इन इंडिया को प्राथमिकता बताया है किंतु यह बड़ी कमजोरी है, दिक्कत यह है कि किसी को भी सेना के लिए उपयुक्त हथियार बनाने का अनुभव कभी नही रहा है।जाहिर है देश फिलहाल समय बर्बाद करने की स्थिति में नही है।
  • सरकारी क्षेत्र की कम्पनियो ने भले ही बहुत किफायती प्रदर्शन नही किया हो लेकिन उसकी विशेषज्ञता और क्षमता बेमिसाल है अतः उनकी इन खूबियों को मेक इन इंडिया की नीतियों में उपयोग किया जाए तथा निजी क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए जिससे विकास के दिशा में भी काम किया जाना चाहिये जिससे परिणाम सकारात्मक मिले।
  • जीडीपी के 2 फीसदी से भी कम हिस्से के साथ रक्षा क्षेत्र को जारी किया गया फण्ड पर्याप्त नही है किंतु 2.74 लाख करोड़ रुपये की राशि कम भी नही है तथा इस राशि को भी अगर आधुनिकीकरण के लिए इस्तेमाल नही किया गया तो यह चिंता का विषय है।
  • सीमा सड़क का बुनियादी ढांचा अपर्याप्त है और इसके चलते सीमा पर तैनाती प्रभावित हो रही है अतः इन क्षेत्रों में भी रक्षा मंत्री को उचित उपचार देना होगा।

MTCR- Missile Technology Control Regime (Part-2)

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